‘स्वतंत्रता’ चिंतन के खोलती है कई आयाम 

मनीषीसंतमुनिश्रीविनयकुमारजीआलोक

0
33
Buzzing Chandigarh (Poonam) चंडीगढ़, 14 अगस्त: स्वतंत्रता मतलब आदमी के रूप में अपने ढंग से जीने का अवसर। स्वतंत्रता आदमी को आत्मविश्वासी, कर्तव्यपरायणता और संवेदनशील बनाती है। ‘स्वतंत्रता’ जीने का नया आस्वाद देती है। स्वतंत्रता देती है अपने विकास की गति को तीव्रतम करने की ताकत और अपने अनुसार विकास को तय करने की समझ।  ‘स्वतंत्रता’ समाज में ‘गैरबराबरी’ की स्थिति पर प्रहार करती है और उसे परे ढकेल कर समाज में बराबरी का वातावरण पैदा करती है। स्वतंत्रता का गैरबराबरी से बैर होता है। गरीबी के लिए ‘स्वतंत्रता’ में कोई स्थान नहीं होता और भेदभाव को स्वतंत्रता में घुसने नहीं दिया जाता। ‘स्वतंत्रता’ चिंतन के कई आयाम खोलती है और बराबरी से विमर्श का अवसर देती है। 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ। विदेशी शासन से आजाद हुआ। हम स्वतंत्र हुए। मतलब क्या इतना ही हुआ कि यह एक ‘ट्रांसफर ऑफ पावर’ मात्र हुआ। इतिहास की एक परिघटना मात्र है कि उस दिन सत्ता का हस्तांतरण हुआ। अंग्रेजी हुकूमत ने भारत की एक पार्टी को सत्ता हस्तांतरण कर दिया कि लो अब तुम राज करो। क्या स्वतंत्रता यही है? क्या इसी सत्ता हस्तांतरण की खुशियां हम 70 साल से मना रहे हैं? आमजन क्या केवल ‘आयोजन’ में भागीदार है और वह देख-सुन रही है कि वह स्वतंत्र है लेकिन स्वतंत्रता का उसकी मूल अवधारणा में अनुभव नहीं कर रही है। क्या स्वतंत्रता कुछ खास तक ही स्वतंत्रता का सुख पहुंच रही है। हमे अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करनी होगी तभी हम आजाद भारत के आजाद नागरिक हो सकते है। ये शब्द मनीषीसंतमुनिश्रीविनयकुमारजीआलोक ने 15 अगस्त की पूर्व संध्या पर सैक्टर 24 सी अणुव्रत भवन तुलसी सभागार मे सभा को संबोधित करते हुए कहे।
मनीषीसंत ने देशवासियों को स्वतंत्रता पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा आजादी यह एक ऐसा शब्द है जो प्रत्येक भारतवासी की रगों में खून बनकर दौड़ता है। स्वतंत्रता हर मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है। तुलसीदास जी ने कहा है पराधीन सपनेहुं सुख नाहीं अर्थात पराधीनता में तो स्वप्न में भी सुख नहीं है। पराधीनता तो किसी के लिए भी अभिशाप है।  जब हमारा देश परतंत्र था उस समय विश्व में हमारी किसी प्रकार की कोई इज्जत नहीं थी। न हमारा राष्ट्रीय ध्वज था, न हमारा कोई संविधान था। आज हम पूर्ण स्वतंत्र हैं तथा पूरे विश्व में भारत की एक पहचान हैं। हमारा संविधान आज पूरे विश्व में एक मिसाल है। जिसमें समस्त देशवासियों को समानता का अधिकार है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज भी प्रेम, भाईचारे व एकता का प्रतीक है। भारत वर्ष के महान संविधान रचयिता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान में विशेष रूप से भारत के प्रत्येक नागरिक को आजादी का अहसास कराया है, अथवा विशेष अधिकार दिए हैं। जब से हमारा भारत आजाद हुआ है तभी से आर्थिक व तकनीकी रूप से हमारा देश सम्पन्नता की ऊंचाइयों तक पहुंचा है।  आज भारत पूर्व विश्व में अतुल्य है। सामाजिक कुप्रथाओं का अंत हुआ, गरीबों का आर्थिक शोषण समाप्त हुआ तथा गांवों की दयनीय स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। आज भारत सहित पूरा विश्व आतंकवाद से जूझ रहा है, जो आजादी के नाम पर एक सबसे बड़ा कलंक है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here