सृष्टि मे हर एक की मन अवस्था अलग-अलग:

मनीषीसंतमुनिश्रीविनयकुमार जी आलोक

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Buzzing Chandigarh june 25 (Poonam) चंडीगढ़,  सफलता क्या है? हर किसी की सफलता की परिभाषा दूसरों से भिन्न है। इसलिए हर किसी की सफलता की व्याख्या अलग होती है। कुछ के लिए यह मन की एक अवस्था है, कुछ के लिए भौतिक सुख, तो कुछ के लिए एक निश्चित पद को पाना और कुछ के लिए समाज में कुछ बड़ा कर नाम और शोहरत पाना। मेरे विचार से सफलता कभी पूर्ण नहीं होती है बल्कि यह सापेक्ष होती है। यह सिर्फ एक अल्पविराम है, पूर्णविराम नहीं। यह अंत न होकर जीवन की यात्रा का सिर्फ एक मोड़ है। इससे कभी संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता। असल में सफलता हमेशा बेहतर करने और आगे बढऩे का संदेश देती है। मुझे अपने जीवन में एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं मिला है जो अपनी सफलता से संतुष्ट हो, चाहे वह शीर्ष राजनीतिज्ञ या नामचीन व्यक्ति हो या एक सफल खिलाड़ी हो। मैंने हमेशा इन सभी को दूसरों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए ही पाया है और दूसरों की सफलता को देखते हुए एक व्यक्ति अपनी सफलता का आनंद ही नहीं ले पाता। । ये शब्द मनीषीसंतमुनिश्रीविनयकुमार जी आलोक ने सैक्टर 18सी गोयल भवन 1051  में कहे।
मनीषीसंत ने आगे कहा  यह सब इसलिए भी समझना जरूरी है, क्योंकि हम इनका अंतर भूलकर, जिंदगी के रास्ते से उतरे ही नहीं, बहुत दूर चले गए हैं. हालात यह हो गए हैं कि हमने पैसे कमाना तो सीख लिया, लेकिन जिंदगी जीने के सारे तरीके भुला बैठे हैं! इसीलिए हम खुशहाल के ख्वाब बुनने के फेर में ऐसे लिपटे कि जिंदगी को ‘फूलों की नगरी’ से ‘रेगिस्तान’ बना बैठे. हमें जिंदगी को उसके होने के असली अर्थ तब पहुंचने के लिए खुद के पास जाने की जरूरत है. उनके पास जाने की जरूरत है, जिनसे इसको अर्थ मिलता है.
मनीषीश्रीसंत ने अंत मे फरमाया हम खुश होने का अवसर खोजने के फेर में छोटे-छोटे अवसर गंवाते जाते हैं। प्रसन्नता के अवसर खोते जाना अपने संचित धन से हर दिन रूपये खर्च करते जाने जैसा है. इस तरह खर्च करते रहने से बचत नहीं हो पाती. खुश रहने का अवसर गंवाने से हम उल्लास से दूर होते जाते हैं. हर दिन! अंत में रोमांच. नई चुनौती का सामना करना. उन्हें स्वीकार करना. अपने लिए चुनौती पैदा करना. मेरे लिए रोमांच के यही अर्थ हैं. इससे न कम, न ज्यादा. हममें से बहुत से लोग रोमांच को बाहरी अर्थ में ग्रहण करते हैं. मिसाल के लिए ऐसे काम करना जो दूसरे कर पाने की हिम्मत न करें. बर्फ के पानी में नहाना. ऊंची जगह से छलांग लगाना. कुछ ऐसा करना जो दूसरे न कर पाएं. लेकिन मेरे लिए रोमांच एकदम निजी और आंतरिक विषय है! आनंद, उल्लास और रोमांच हमारे घनिष्ठ मित्र हैं. जो इंटरनेट, स्मार्टफोन और जीवन की भागदौड़ में कुछ रूठे हैं, लेकिन इतने नहीं कि मिल न सकें. हमारी ओर लौट न सकें. बस, ईमानदार कोशिश चाहिए, स्वयं को जानने, समझने और बचाने की!

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