श्राद्ध करने से प्रसन्न होते हैं हमारे पूर्वज -लेखिका: मंजू मल्होत्रा फूल

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Buzzing Chandigarh Sep,5:(Jay) यूं तो अपने मां-बाप की उनके जीवन काल में सेवा करना, और उनकी अच्छे से देखभाल करना मानव के लिए इससे बड़ा सत्कर्म शायद ही कोई होगा। परंतु हमारे सभी परिजनों  की सेवा करने का या सभी पूर्वजों को तृप्त करने का सौभाग्य हमें उनके जीवन काल में  प्राप्त नहीं होता। इसी कारण यह श्राद्ध की परंपरा बनाई गई है। जिससे हम अपने उन पूर्वजों का भी अपनी  पूर्ण श्रद्धा  के साथ जलदान पिंडदान,  पिंड रूप में भोजन समर्पित कर सकें।हमारे धार्मिक ग्रंथों के अनुसार पितृपक्ष भाद्रपद की पूर्णिमा से शुरू होकर अश्वनी मास की अमावस्या तक चलते हैं। पितृपक्ष 15 दिनों तक मनाया जाता है। इस वर्ष पितृपक्ष 13 सितंबर से 28 सितंबर तक रहेगा। पितृपक्ष या श्राद्ध में पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनको तर्पण किया जाता है। हमारे जो भी परिजन जिनकी मृत्यु हो चुकी है उन्हें पितर कहा जाता है। पुराणों के अनुसार मृत्यु के देवता यमराज श्राद्ध पक्ष में जीव को मुक्त कर देते हैं, ताकि वह स्वजनों के यहां जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें। पितृपक्ष में हम जो भी पितरों के नाम का निकालते हैं उसे वे सूक्ष्म रूप में आकर ग्रहण करते हैं। केवल तीन पीढ़ियों का श्राद्ध और पिंडदान करने का ही विधान है। अपने पितरों के प्रति श्रद्धा के साथ अर्पित किया गया तर्पण अर्थात जलदान पिंडदान पिंड के रूप में पितरों को समर्पित किया गया भोजन, यही श्राद्ध कहलाता है। हमारे धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सर्वप्रथम श्राद्ध का उपदेश महर्षि  निमी को महा तपस्वी अत्रि मुनि ने दिया था। इस तरह सबसे पहले महर्षि निमी ने श्राद्ध का आरंभ किया। समय के साथ अन्य ऋषि-मुनियों ने भी इसे अपनाया और सभी जन तब से श्राद्ध की परंपरा का निर्वाहन करने लगे। हरवंश पुराण में भी बताया गया है कि भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताया था कि श्राद्ध करने वाला व्यक्ति दोनों लोकों में सुख प्राप्त करता है। श्राद्ध से प्रसन्न होकर पितर इच्छा अनुसार वरदान देते  हैं। धर्म चाहने वाले को धर्म, संतान चाहने वाले को संतान, कल्याण चाहने वाले को कल्याण का वरदान प्राप्त होता है।
श्राद्ध में लोग कौओं, कुत्ते और गाय के लिए भी अंश निकालते हैं । ऐसी मान्यता है कि  यह सभी जीव यम के काफी नजदीक हैं तथा मृत्यु के पश्चात गाय वैतरणी पार कराने में सहायक है। यूं तो हमें इस सृष्टि में मनुष्य के ऊपर निर्भर जीवो एवं पशु पक्षियों के लिए रोज ही भोजन निकालना चाहिए, परंतु ऐसा हर समय मानव नहीं करता। श्राद्ध के इन दिनों में अपने ऊपर निर्भर जीवो जैसे कौओं, कुत्तों और गौ माता के लिए भोजन निकालने से व्यक्ति को असीम पुण्य प्राप्त होता है। श्राद्ध करने से व्यक्ति के पूर्वज प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इससे घर में सुख शांति का वातावरण बनता है और समृद्धि आती है।

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