महर्षि वाल्मीकि ने रामायण में श्री राम जन्मभूमि की तुलना इंद्रलोक से की है। वेदों में भी अयोध्या को ईश्वर की नगरी बताया गया है:: मंजू मल्होत्रा फूल

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Buzzing Chandigarh,Aug,2:
नौमी भौम बार मधुमासा ।अवधपुरी यह चरित प्रकासा।।
जेहि दिन राम जनम श्रुति गावहिं। तीरथ सकल तहां चली आवहिं।।
चैत्र मास की नवमी तिथि मंगलवार को श्री अयोध्या जी में यह चरित्र प्रकाशित हुआ। जिस दिन श्री रामजी का जन्म होता है वेद कहते हैं कि उस दिन सारे तीर्थ श्री अयोध्याजी में चले आते हैं।
अयोध्या हिंदुओं के सात पवित्र स्थलों में से एक है। सात पवित्र स्थल जिसमें अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांची, अवंतिका और द्वारका शामिल है।  आज सज रही है अयोध्या नगरी। यदि लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल का  असमय निधन ना हुआ होता तो सोमनाथ की तरह अयोध्या का भी उद्धार हो गया होता।  पर ऐसा नहीं हो सका । लेकिन अब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या का नया इतिहास लिखा जा रहा है।  5 अगस्त को भूमि पूजन के साथ यहां प्रभु श्री रामजी  के भव्य मंदिर का निर्माण प्रारंभ हो जाएगा।
धन- धान्य व रत्नों से भरी अयोध्या नगरी की अतुलनीय छटा और गगनचुंबी इमारतों के अयोध्या नगरी में होने का वर्णन वाल्मीकि रामायण में मिलता है।  महर्षि वाल्मीकि ने रामायण में जन्मभूमि की शोभा और महत्ता की तुलना दूसरे इंद्रलोक से की है। वेदों में भी अयोध्या को ईश्वर की नगरी बताया गया है और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या को प्रभु श्री राम के पूर्वज विवस्वान के पुत्र वैवस्वत मनु ने बसाया था । यहीं पर प्रभु श्री राम का  राजा दशरथ के महल में जन्म हुआ था।  श्री राम की अवध भूमि और उस पर बने मंदिर की भव्यता देखते ही बनती थी। इतिहासकारों के अनुसार पानीपत के युद्ध के बाद राजा जयचंद का अंत हो गया और भारतवर्ष पर आक्रांताओं का आक्रमण और बढ़ गया। आक्रमणकारियों ने काशी, मथुरा के साथ-साथ अयोध्या में भी लूटपाट की तथा पुजारियों की हत्या और मूर्तियों के तोड़ने का क्रम जारी रखा। 14 वीं शताब्दी में हिंदुस्तान पर मुगलों का राज हो गया और उन्होंने राम जन्मभूमि एवं अयोध्या को नष्ट करने के लिए कई अभियान चलाए।  1527- 28 में भव्य राम मंदिर को तोड़ दिया गया और बाबरी मस्जिद ढांचा खड़ा किया गया।  मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर के एक सेनापति ने अयोध्या में श्री राम के जन्म स्थान पर स्थित प्राचीन और भव्य मंदिर को तोड़कर एक मस्जिद बनवाई, जो 1992 तक विद्यमान रही। बाबरनामा के अनुसार 1528 में अयोध्या पड़ाव के  दौरान बाबर ने मस्जिद निर्माण का आदेश दिया था। हालांकि  यह भी कहा जाता है कि अकबर और जहांगीर के शासनकाल में हिंदुओं को  यह भूमि सौंप दी गई थी। परंतु क्रूर शासक औरंगजेब ने अपने पूर्वज बाबर के सपने को पूरा करते हुए यहां  मस्जिद का निर्माण किया और बाबरी मस्जिद उसका नाम रखा । परंतु बात केवल  मंदिर की नहीं थी, बात थी प्रभु श्री राम के जन्म स्थान की। अयोध्या में  उस स्थान पर प्रभु श्री रामचंद्र का जन्म हुआ था।  ऐसे में राम जन्मभूमि पर बने भव्य राम मंदिर को तोड़कर एक मस्जिद का निर्माण किया जाना , यह आस्था और भावनाओं को गहरा आघात  था।  इसलिए लगभग 500 वर्ष का संघर्ष चलता रहा  प्रभु श्री राम के जन्म स्थान के लिए। संघर्ष जारी रहा उस स्थान के लिए जहां त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने राम के रूप में अवतार लिया था और राक्षसों के आतंक  से मनुष्यों की रक्षा करके धर्म की स्थापना की थी। हजारों  लाखों कुर्बानियों के बाद आज ये सुखद घड़ी आई है।  5 अगस्त, 2020  बुधवार को मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जन्म स्थान सरयू के तट पर भव्य राम मंदिर निर्माण का भूमि पूजन होगा। इस पवित्र दिन को संपूर्ण भारत एवं विश्व दीप प्रज्वलित करें। सभी भारतवासी अपने घर में इस दिन दीप प्रज्वलित करें और रामायण का पाठ करें। इस दिन को यादगार बनाने के लिए औषधीय एवं फलदार वृक्ष जैसे आम, जामुन, नीम, आंवला, पीपल, बरगद आदि लगाकर प्रभु श्री राम जी के मंदिर का भव्य भूमिपूजन धूमधाम से यादगार के रूप में मनाए,,,,,,,,,,,,,,,,

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