बुराई किसी का पीछा नहीं करती

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चंडीगढ़,Oct,8″ बुराई किसी का पीछा नहीं करती है, बल्कि व्यक्ति ही बुराई का पीछा करती है, उसको अपनाता है, उसको आदत बनाता है और फिर वह बुराई का आदी हो जाता है। केवल नशीले पदार्थांे का सेवन करना या फिर अन्य गलत चीजों का सेवन करना ही बुराई नहीं है। बुराइयां किसी को नहीं अपनाती हैं बल्कि व्यक्ति ही होता है जो इनको अपनाता है और अपने अनमोल जीवन को इन बुराइयों का माध्यम बनाकर कलंकित कर लेता है। आइए, इन सब बुराइयों को नहीं पकड़े बल्कि अच्छाइयां का हाथ पकड़े। जिंदगी अनमोल प्यारे, सद्गुण अपनाले सारे, बुराई ने किसको छोड़ा मीत, यह तडफ़ा-तडफ़ाकर मारे। ये शब्द मनीषीसंतमुनिश्रीविनयकुमार जी आलोक ने कहे।
मनीषीसंत ने आगे कहा प्रसन्नता के अवसर खोते जाना अपने संचित धन से हर दिन रूपये खर्च करते जाने जैसा है. इस तरह खर्च करते रहने से बचत नहीं हो पाती. खुश रहने का अवसर गंवाने से हम उल्लास से दूर होते जाते हैं. हर दिन! अंत में रोमांच. नई चुनौती का सामना करना. उन्हें स्वीकार करना. अपने लिए चुनौती पैदा करना।
मनीषीसंत ने आगे कहा कुछ लोग कह सकते हैं कि सांस लेने का वक्त नहीं. इतना समय ही कहां मिलता है। ऐसे सवाल के लिए बस यही कहा जा सकता है कि आप कितने ही व्यस्त रहते हों, लेकिन आपके पास फिर भी गुस्से, दूसरों को कोसने निंदा रस में घुलने के लिए वक्त होता ही है! तो फिर अपनी ही सूरत के नजदीक जाने, खुद को संवारने, आत्मा पर जमे मैल को साफ करने के लिए समय कहीं से आयात करने की जरूरत नहीं।वह तो आपके पास पहले से है. बस आपको देखना है कि आईना, क्या कहता है। उसकी भाषा, अर्थ को समझने के लिए बहुत तो नहीं, लेकिन थोड़ी गहरी, गंभीर नजर तो चाहिए ही।और हां, सबसे जरूरी यह कि ‘आईना’ सही हो. क्योंकि उसमें जरा भी चूक हुई तो कहानी दूसरी ओर निकल जाएगी!
मनीषीसंत ने अंत मे फरमाया किसी अच्छे व्यक्ति और बुरे व्यक्ति में जो बड़ा अंतर है वह यह है कि अच्छा व्यक्ति बदले में साथ देता है और बुरा व्यक्ति सबक देता है। मोमबत्ती को अंधकार के समय में ही याद किया जाता है ठीक वैसे ही जैसे किसी सीधे सरल मित्र को संकट के समय याद किया जाता है क्योंकि उस पर विश्वास होता है लेकिन यह त्रासदी है कि ऐसा मित्र केवल संकट के समय में ही पास होता है। गीता पर हाथ रखकर कसम खाते हैं लोग लेकिन उसे जीवन में नहीं उतारकर गम खाते हैं लोग। गीता पर हाथ रखकर कसम खाना अच्छी बात है लेकिन गीता को साथ रखना सबसे अच्छी बात है।मां का दिल एक ऐसा सुरक्षित शाश्वत बैंक है जिसमें व्यक्ति अपनी भावनाओं, संवेदनाओं और विचारों को जमा करवा सकता है और तुरंत कई गुणा ज्यादा प्राप्त कर सकता है।

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