पर्यावरण के साथ खिलवाड न करे खिलवाड

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चंडीगढ, 21 सिंतबर जिस तरह से पानी व पेड पौधो के कारण उत्पन्न हुए पर्यावरण संकट ने पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, राजस्थान समेत पूरे उत्तर भारत को अपनी लपेट में लिये हुए है हर जगह गर्मी व धूल भरे कणों ने आम जनजीवन को अस्त व्यस्त बना दिया । जिस कारण बाहर निकलना तो दूर की बात सांस लेने में भी परेशानी हो रही है। इन सबका कारण आज का इंसान है जो अपने स्वार्थ के कारण लगातार पानी का दुरूपयोग व पर्यावरण के साथ खिलवाड करने से बाज नही आ रहा है इसी कारण ही यह विकराल संकट सभी राज्यो मे उत्पन्न हो गया है। अगर जल्द इंसान सभला नही तो बहुत देर हो जाएगी और इसके परिणाम और भी विकराल देखने को मिलेगें इसलिए सभंल जाईये। पिछले दिनो पृथ्वी के सबसे बडे जंगल अमेजन मे लगी आग ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी और खिंचा सोचकर हैरानी होती है कि पूरी दुनिया को 20 प्रतिशत आक्सीजन अमेजन का जंगल देता है। यह अश्चर्य की बात है। पृथ्वी पर कुदरत के अलग अलग रंग है इन्हे संजोकर रखना हर मानव का परम कर्तव्य है। ये शब्द मनीषीसंतमुनिश्रीविनयकुमार जी आलोक ने अणुव्रत भवन सैक्टर-24 तुलसी सभागार में जनसभा को संबोधित करते हुए कहे।
मनीषीश्रीसंत ने कहा कि पानी व पेड पौधों के काटने से दुनिया  विकराल संकट से जूझ रही है तो भारत भी इससे अछूता नहीं है। इन चुनौतियों का तोड़ निकालने के बीच अब विभिन्न मंचों पर जलवायु परिवर्तन की चिंता पर चर्चा भी आम हो गई है।  ये शब्द मनीषीसंतमुनिश्रीविनयकुमारजीआलोक ने रविवारिय सभा को संबोधित करते हुए कहे।
मनीषीश्रीसंत ने कहा पेड पौधों को बचाने के लिए व पानी का सदुपयोग के लिए एक अभियान चलाने की जरूरत है और तो और जो पानी का दुरूपयोग कर रहे है व पेड पौधो व पर्यावरण को हानि पहुंचाते है उनके खिलाफ सरकारो को कडी से कडी कार्रवाई करनी चाहिए। स्कूलो, कॉलेजो और परिवारो मे भी बच्चो, बडो, बुजुर्गो सभी को पर्यावरण के प्रति जागरूक करे।
जल प्रबंधन से जुड़े पहलुओं पर सार्थक चर्चा के लिए भारत ने  भी जल सप्ताह की शुरुआत हुई है। इस साल भी भारत सरकार के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरोद्धार मंत्रालय के तत्वाधान में इसके पांचवें संस्करण का आयोजन किया जा रहा है। मैं इस दिशा में तत्काल कदम उठाने की हिमायत इसलिए करता हूं, क्योंकि बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन बेहद सीमित हैं। अंधाधुंध दोहन से वे तेजी से सिकुड़ते जा रहे हैं।
मनीषीश्रीसंत ने अंत मे फरमाया जल का संग्रह करने के लिए नदियों को जोडऩा मौजूदा सरकारों को प्राथमिकताओं में शामिल करना होगा जिससे पानी को किल्लत वाले क्षेत्रों को भी जल पहुंचाया जा सके। जाहिर है जल संसाधनों के सतत विकास के लिए मौजूदा सरकार ने तमाम प्रयास किए हैं और जब इन प्रयासों को सभी वर्गों का साथ मिलेगा तो भारत निश्चित रूप से जल को लेकर संवेदनशील समाज बन जाएगा।

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