नवजात शिशु की मेडीकल केयर देश में अभी भी चिंताजनक

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Buzzing Chandigarh (Jay) पंचकूला, 13 जून ( ): स्थानीय पारस बलिस अस्पताल के बाल रोग विभाग के डायरेक्टर डा. ओ.एन.भकू ने कहा कि मुर्दा जन्म लेने वाले बच्चों के मामले में भारत विश्व के पांचवे हिस्से पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा नवजात बच्चों की मौत भी भारत में विश्व भर के मुकाबले तीसरे हिस्से में होती है, जो कि एक चिंता का विषय है। आज यहां नवजात बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी भारत में मौजूद सुविधाओं संबंधी जागरूकता पैदा करने के मकसद से रखी प्रैस कान्फ्रेंस को संबोधन करते हुए उन्होंने कहा कि 6.6 मिलियन बच्चे पांच साल की उम्र के दौरान ही विश्व भर में मौत की गोद में चलते जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में हर वर्ष 28 दिनों तक की उम्र बिता चुके नवजात बच्चों में से तकरीबन 0.75 मिलियन बच्चे मर जाते हैं, जबकि 70 फीसदी चार सप्ताह तक की उम्र बिता चुके बच्चे मर रहे हैं। इस अवसर पर बोलते हुए डा. सौरभ गोयल ने कहा कि बीते दो दशकों दौरान गर्भवती महिलाओं व बच्चों की स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए बड़ी खोजें हुई हैं। उन्होंने कहा कि नवजात बच्चों की मौतों के ज्यादा कारण जन्म के समय इनफेक्शन हो जाने से भी होती है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में 1000 जन्म के पीछे हर वर्ष 28 बच्चों की मौतें हो रही हैं, जो कि झारखंड व बिहार जैसे पिछड़े राज्यों से अधिक हैं। उन्होंने कहा कि पारस अस्पताल ने फैसला किया है कि नवजात बच्चों की स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अंबाला, करनाल, यमुनानगर व सोलन में वेंटीलेटेड एंबूलैंस की सुविधा मुहैया करवाई जाए।
इस अवसर पर बोलते हुए बाल सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डा. के.एल.एन राओ ने कहा कि पारस अस्पताल में बच्चों के आप्रेशन की आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि पारस अस्पताल आसपास के शहरों के डाक्टरों के लिए नई तकनीकों की ट्रेनिंग देने की सुविधा भी मुहैया करवा रहा है। उन्होंने कहा कि नर्सों एवं पैरा मैडीकल स्टाफ को टेली मैडीसन विधि द्वारा आईसीयू की ट्रेनिंग दी जाती है। उन्होंने कहा कि फिलहाल वेंटीलेटेड सुविधा उक्त शहरों में दी जाएगी, जिनको बाद में और भी नजदीकी शहरों में बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आम तौर पर सही टाइम पर अस्पताल न पहुंचने के कारण नवजात बच्चों की मौत होती है, जिस कारण फैसला किया गया है कि बढिय़ा सुविधा वाली ट्रांसपोर्ट सेवाएं मुहैया करवाई जाएं।

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