धूम्रपान से एक साल में 3 लाख कैंसर पीडि़तों की हो जाती है मौत: डा. साहू

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Buzzing Chandigarh (Jay)यमुनानगर, 13 जुलाई : पंचकूला स्थित पारस मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के ऑनकोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डा. बिग्रे. राजेश्वर सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता की कमी व देरी से इलाज करवाने की आदत के कारण भारत में कैंसर के मरीजों में बेशुमार इजाफा हो रहा है।आज यहां कैंसर के बढ़ रहे प्रभाव को रोकने तथा वल्र्ड नो तंबाकू दिवस के संबंध में रखे एक समारोह के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि इस समय देश में करीब 25 लाख व्यक्ति कैंसर से पीडि़त हैं, जिनमें 12 लाख केस नए हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति इस हद तक भयंकर हो चुकी है कि हर साल कैंसर के कारण भारत में पांच लाख मौतें हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय महिलाओं में ब्रेस्ट एवं गर्भाश्य ग्रीवा के कैंसर की ज्यादा संख्या है, जबकि जीभ एवं मुंह के कैंसर की लपेट में पुरुष आ रहे हैं।उन्होंने कहा कि 65 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक कैंसर के मरीज 50 साल की उम्र से ज्यादा वाले हैं, जबकि 50 साल से कम वालों में सिर्फ 30 से 35 प्रतिशत मरीज हैं। उन्होंने कहा कि इस समय छाती के कैंसर से प्रभावित मरीजों में 50 प्रतिशत तक 25 से 50 वर्ष की उम्र वाली महिलाएं हैं। उन्होंने सलाह दी कि इस संबंधी समय पर स्क्रीनिंग टेस्ट एवं मैमोग्राफी करवाना अनिवार्य है।इस अवसर पर अपने संबोधन में कैंसर रोग विभाग के सीनियर कंसलटेंट डा. राजन साहू ने बताया कि विश्व में हर वर्ष 182 लाख मुंह के कैंसर वाले नए केस सामने आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि तंबाकू तथा गुटके के प्रयोग के कारण भारत में 90 प्रतिशत केस मुंह के कैंसर वाले आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि रोजाना के रहन-सहन के तरीकों में तबदीली लाकर ही ऐसी समस्या से बचाव हो सकता है। उन्होंने बताया कि स्थिति यह बन चुकी है भारत मुंह के कैंसर से प्रभावित मरीजों की राजधानी बनने की स्थिति में आ गया है। उन्होंने कहा कि देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी माना है कि 65 प्रतिशत से ज्यादा मुंह के कैंसर तंबाकू के प्रयोग के कारण होते हैं। उन्होंने बताया कि देश में तंबाकू के सेवन से करीबन 8 लाख में से हर साल 3 लाख कैंसर पीडि़त की मौत हो जाती है।
इस अवसर पर बोलते हुए ऑनकोलॉजिस्ट रेडिशियन विभाग के डा. परनीत सिंह ने कहा कि अगले दो दशकों दौरान कैंसर में बेशुमार इजाफा होने वाली स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि रेडिशियन विधि तेज किरणों द्वारा कैंसर के सैलों को खत्म करने का काम करती है, जिसका कोई भी शरीर पर अतिरिक्त असर नहीं पड़ता।
ऑनकोलॉजी आर्थो विंग के डाक्टर जगनदीप सिंह ने कहा कि हड्डियों के कैंसर वाले 90 फीसदी केस आप्रेशन से हल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि पारस अस्पताल में नई तकनीक मौजूद हैं, जिससे मरीज बड़ा लाभ ले सकते हैं। इस अवसर पर बोलते हुए न्यूकिलियर मेडीसन के डा. अनुपम गाबा ने कहा कि पी.टी. स्केन द्वारा कैंसर की मौजूदगी का पता लग सकता है। इसके अलावा कैंसर के संभावित इलाज आदि के बारे भी जानकारी मिल जाती है।

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