केंद्र सरकार की प्रस्तावित शिक्षा नीति पर निसा ने उठाए सवाल

बीएड से पहले हो टैट की अनिवार्यता लागू

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Buzzing Chandigarh June 25 (Jay) चंडीगढ़।चंडीगढ़ सेक्टर 7 में हुई प्रेसवार्ता के दौरान कुलभूषण शर्मा ने बताया कि इस समय हरियाणा में हजारों की संख्या में बजट प्राईवेट स्कूल चल रहे हैं। इस नीति में इस श्रेणी के स्कूलों के लिए कोई प्रावधान नहीं रखा गया है। उन्होंने हरियाणा के यमुनानगर व अन्य जिलों में अध्यापकों व प्रधानाचार्यों पर हुए हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि नई प्रस्तावित शिक्षा नीति में अध्यापकों, प्रधानाचार्यों की सुरक्षा के मुद्दे पर कोई नीति नहीं बनाई गई है।केंद्र सरकार द्वारा देशभर में लागू की जा रही शिक्षा नीति 2019 पर अपने सुझाव देने के लिए नेशनल इंडीपेंडेंट स्कूल्स एलांइस (निसा) के बैनर तले हरियाणा के निजी स्कूल संचालकों ने इस नीति में संशोधन की मांग उठाई। निसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा तथा हरियाणा प्रदेश महासचिव बलदेव सैनी ने आज यहां विभिन्न स्कूल संचालकों से इस विषय पर विचार-विमर्श के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि केंद्र सरकार द्वारा देशभर में नई शिक्षा नीति को लागू किया जा रहा है। इस नीति पर देश के करोड़ों बच्चों तथा स्कूल संचालकों का भविष्य टिका हुआ है।
अधिकांश स्कूलों के प्रधान व संचालक अवकाश पर है अथवा घर-परिवार के साथ बाहर गए हुए हैं। इसके साथ ही जिस पॉलिसी को बनाने में कमेटी ने तीन से ज्यादा वर्षों का समय लिया उस 648 पेज की पॉलीसी का विश्लेषण कर सुझाव व आपत्तियाँ प्रस्तुत करने हेतु मात्र 30 दिन का समय ही दिया गया है जो कि पर्याप्त नहीं है। इसलिए इस पर सुझाव एवं आपत्तियां दर्ज करवाने के लिए कम से कम दो माह का समय दिया जाना चाहिए।
शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार की प्रस्तावित शिक्षा नीति के अनुसार अध्यापकों के लिए बीएड के बाद टैट (अध्यापक पात्रता परीक्षा) को लागू किया जा रहा है। जिसका कोई औचित्य नहीं है। अगर सरकार टैट की मान्यता को बरकरार रखना चाहती है तो इस परीक्षा का आयोजन बीएड से पहले किया जाए।
गैर अनुदानित निजी विद्यालयों में सरकारी स्कूलों के समान एसएमसी (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) बनाने का विरोध करते हुए निसा के पदाधिकारियों ने कहा कि यह संविधान द्वारा प्रदत्त व्यवसाय करने के मौलिक अधिकारों के विपरीत है।
इसी में बाक्स—
निसी की बैठक में पारित किए गए प्रस्ताव एवं सुझाव
–देशभर  की  कोचिंग  क्लासेज को रेग्यूलेट किया जाए।
–मेडिकल व इंजीनियरिंग में प्रवेश परीक्षाओं के साथ-साथ स्कूल बोर्ड के नंबरों को भी बराबर का वैटेज (भार) दिया जाए।
–गैर अनुदानित निजी विद्यालयों को स्वायत्तता प्रदान की जाए।
–आरटीई के अंतर्गत पैसा स्कूलों को न देकर सीधे भेजें/माता-पिता के खाते में डीबीटी वाऊचर द्वारा डाला जाए।
–अध्यापकों व प्रिंसीपल की सुरक्षा का नहीं कोई प्रस्ताव
–बीएड से पहले हो टैट की अनिवार्यता लागू
–नए ड्राफ्ट में बजट प्राइवेट स्कूलों के लिए नहीं कोई प्रावधान

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